सात महापाप

(१)मेहनत के बिना दोलत (२) अंतरात्मा के बिना आनंद (३) चरित्र के बिना ज्ञान (४)नैतिक मूल्यों के बिना व्यापार (५) इंसानियत के बिना विज्ञान (६) त्याग के बिना धर्म (७)सिदान्तो के बिना राजनीति-----------महात्मा गाँधी