ज्ञान प्राप्ति का मूलभूत उदेश्य संस्कार युक्त जीवन का निर्माण होना चाहिए । शिक्षा की प्राप्ति के साथ यदि जीवन में संस्कारों का सिंचन नहीं होता हो तो वह ज्ञान आत्मा के लिए हानिकारक ही सिद्ध होता है।
आज शिक्षण की ओर जितना ध्यान दिया जाता है , उतना संस्कार की ओर नहीं। ओंर इसी के परिणाम स्वरुप आज
शिक्षण की वृदि होने पर भी संस्कारों का ह्रास ही हो रहा है।